गुरुवार, 10 सितंबर 2020

*रघवा रटत सु प्रत्यक्ष कब पाय हूँ*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏 
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*तहँ दिन दिन अति आनन्द होइ,* 
*प्रेम पिलावै आप सोइ ।* 
*संगियन सेती रमूं रास,* 
*तहँ पूजा अर्चा चरण पास ॥* 
*(#श्रीदादूवाणी ~ पद्यांश. ३६९)* 
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ* 
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami* 
*मनहर-* 
*नमो नमो नमो निराकार करतार जपि,* 
*विष्णु रु विरंची शिव शेष शीश नाय हूँ ।* 
*द्वादश भगत नमो दश षट पारषद,* 
*नमो नव नाथ जु चौरासी सिद्ध गाय हूँ ॥* 
*देव सर्व ऋषि सर्व निरख नक्षत्र सर्व,* 
*जती षट सती सप्त-बीस हु मनाय हूँ ।* 
*तत्व के नवीस१ त्रय लोक मध्य जे प्रसिद्ध,* 
*रघवा रटत सु प्रत्यक्ष कब पाय हूँ ॥२८॥* 
विश्व के कर्ता निराकर परमात्मा का नाम जपते हुये उन्हें मन से भावना रूप से, वाणी से शब्द के उच्चारण द्वारा और शरीर से साष्टांग दंडवत रूप में नमस्कार करके...
विष्णु, ब्रह्मा, शिव और शेष जी को शिर नमाते हुये प्रणाम करता हूँ । द्वादश भक्तों सोलह पार्षदों, नव नाथों और चौरासी सिद्धों को प्रणाम करके उनका यश गान करता हूँ । 
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सर्व देव, सर्व ऋषि, सर्व नक्षत्र, षट यति, सताईस सती इन सबको पूज्य दृष्टि से देखकर प्रणाम द्वारा मनाता हूं... 
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और तीनों लोकों में जो भक्ति ज्ञानादि रूप तत्व ग्रंथों के लेखक१ प्रसिद्ध हैं, उनको भी प्रणाम करते हुये उनके नाम तथा यश को रटता हूं । प्रत्यक्ष रूप में तो उनको कब तक प्राप्त कर सकूंगा, यह तो अभी निश्चय रूप से नहीं कहा जा सकता, इस समय तो स्मरण मात्र से ही संतोष करता हूं । 
(क्रमशः)

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