🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏🇮🇳 卐 सत्यराम सा 卐 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *#श्री०रज्जबवाणी* 🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू साचे को झूठा कहैं, झूठे को साचा ।*
*राम दुहाई काढिये, कंठ तैं वाचा ॥*
=================
*श्री रज्जबवाणी*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
साभार विद्युत संस्करण ~ @महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
*निन्दा का अंग १२३*
.
निंदक के अगतो१ नहीं, खल२ मल३ धोवहि नित्त ।
रज्जब गिने न रैन दिन, उज्वल करे सुमित्त४ ॥९॥
निंदक अपने निंदा रूप कार्य की छुट्टी१ अमावस्या आदि को भी नहीं करता, वह दुष्ट२ प्रति दिन ही पाप३ धोता रहता है । किन्तु सारग्रह दृष्टि से वह सबका श्रेष्ठ - मित्र४ है कारण रात्रि-दिन को भी कुछ नहीं गिनता रात-दिन निरंतर दूसरों को उज्वल करता ही रहता है ।
.
निंदक के नित नियम यहु, अह१ निश२ करै अनीति ।
रज्जब साँच न सूंघ ही, सब झूठी रस रीति ॥१०॥
निंदक का यह नित्य का नियम है कि रात१ दिन२ निंदा रूप अनिति करता ही रहता है, सत्य को तो वह सूंघता ही नहीं, उसको तो मिथ्या निंदा करने की रीति में ही रस आता है ।
.
नारायण सुर नर सहित, निंदक निंदै माँड ।
रज्जब रुचे न राम को, जगत न भावै भांड ॥११॥
निंदक विष्णु, देवता और नरों के सहित सभी ब्रह्माण्ड की निंदा करता है, उसका यह कार्य न तो राम को रचिकर होता है और न यह भांड जगत् को अच्छा लगता है ।
.
सुर पुर नरपुर नागपुर, निंदक को नहिं ठौर ।
रज्जब राम न राख ही, कहै और की और ॥१२॥
निंदक को रहने के लिये देवता, नर और नागों के नगरों में स्थान नहीं है, राम भी उसे नहीं रखते कारण, वह तो और की और अर्थात सत्य को मिथ्या को सत्य कह देता है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें