🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
*दादू बूड रह्या रे बापुरे, माया गृह के कूप ।*
*मोह्या कनक अरु कामिनी, नाना विधि के रूप ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ माया का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *दंभ*
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दो तपस्वी ऊंची भुजा करके तप में तत्पर थे । एक चतुर वैश्व ने जानना चाहा कि वे दंभी है या सच्चे तपस्वी । एक मोहर ले जाकर दोनों के बीच में रखकर के दूर जाकर किसी वृक्ष की ओट में खड़ा रहकर देखने लगा । थोड़ी देर में दोनों में विवाद चला, एक ने कहा - "मोहर मेरे चढाई है ।" दूसरे ने कहा - "मेरे ।" इस दोनों में झगड़ा हो गया । भुजाए तो ऊंची थी । लातों से ही एक दूसरे को मार कर एक दूसरे से मोहर लेने का प्रयत्न करने लगे । यह देखकर वेश्य समझ गया और जाकर बोला - "मैंने तो किसी के भी नहीं चढाई तुम क्यों लड़ते हो यह कहकर मोहर उठा ले गया ।
दंभ परीक्षा चतुर नर, कर लेत सत बात ।
उर्ध्व बाहु दो मुहर हित, लड़े मार कर लात ॥१२१॥

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