सोमवार, 14 सितंबर 2020

*रटत अखंड व्रत*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*दादू जैसा अविगत राम है, तैसी भक्ति अलेख ।*
*इन दोनों की मित नहीं, सहस मुखां कहै शेष ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ परिचय का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*आदि अनभूत१ तू अलेख है अद्वैत गुन२,*
*नमो निराकार करतार भनै३ शेष है ।*
*हारे न हजार मुख राम कहै रात दिन,* 
*धारैं धर शीश जगदीश जी के पेश है ॥*
*दुगण हजार हरि नाम नित्य नवतम ।*
*रटत अखंड व्रत भगत नरेश हैं ।*
*राघो कहै फनिपति ऐसो है अनन्य अति,*
*केवल भजन बिन आन न प्रवेश है ॥३२॥*
सर्व के आदि उत्पत्ति-रहित१, लेख बद्ध नहीं होने से अलेख, सर्वात्मा होने से अद्वैत, आकार रहित होने से निराकार, ईश्वर रूप से सृष्टि कर्ता होने से करतार, इत्यादि रूप से विचार२ पूर्वक शेष जी परमात्मा परब्रह्म का यश कथन३ करते ही रहते हैं ।
आप एक हजार मुखों से रात-दिन राम-नाम उच्चारण करते रहते हैं, थकते नहीं हैं । शिर पर पृथ्वी को धारण करते हैं फिर भी शय्या रूप होकर जगदीश्वर प्रभु के सामने४ रहते हैं ...
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तथा नित्य नये दो हजार हरि नामों का जप करने का आपका अखंड व्रत है और आप भक्तों के तो राजा ही हैं । 
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हे फनीश्वर शेष जी ! आपका प्रभु में ऐसा अति अनन्य प्रेम है कि केवल प्रभु भजन के बिना आपका मन अन्य किसी भी विषय में प्रवेश नहीं करता । ऐसे आपको मैं प्रणाम करता हूं । आप भक्तमाल रचना रूप कार्य में मेरी अवश्य सहायता करेंगे । 
(क्रमशः)

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