रविवार, 13 सितंबर 2020

= १०९ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*सेवक की रक्षा करै, सेवक की प्रतिपाल ।* 
*सेवग की वाहर चढै, दादू दीन दयाल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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भक्त माधवदास जी जगन्नाथ पुरी में दस्तों कि बीमारी हुई । उससे वे बेहोश तक हो गये । भगवान ने एक युवक वेश में आकर उनकी सेवा की । हरि कर स्पर्श से माधवदासजी के तन में नव जीवन आ गया उसने भगवान को पहचान लिया और बोले - "मुझ अर्धम के लिये आपने इतना कष्ट उठाया, यह रोग ही मेरे न होने देते ।" भगवान - प्रारब्ध कर्म तो सब को भोगना ही पड़ता है किन्तु भक्तों को मैं अपना हाथ उसके शिर रखकर भुगता हूँ । सेवा करता हूँ किन्तु अपने विधान को नहीं मेटता ।"
भक्त कर्म दु:ख भोगते, शीश रहे हरि हाथ ।
माधव दस्तन के समय, सेवा की यदुनाथ ॥४३॥

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