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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*दादू कहै सतगुरु शब्द सुनाइ करि, भावै जीव जगाइ ।*
*भावै अन्तरि आप कहि, अपने अंग लगाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *गुरु*
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जयमल नामक एक बालक की माता ने जयमल को साथ ले महार सामोत के पर्वत में योगिश्रेष्ठ मुकुन्दभारतीजी के पास जा कर अपने पुत्र को शिष्य बनाने की प्रार्थना की । किन्तु मुकुन्दजी ने कहा - "माता ! कुछ और ठहरो, थोड़े ही दिनों में एक महान गुरु प्रगट होने वाले हैं जयमल उन्हीं का शिष्य होगा ।" माता - "कहां प्रकट होंगे, नाम क्या होगा ? मुकुन्दजी - "वे अहमदाबाद नगर में लोदीराम नागर के पुत्ररूप में प्रकट होंगे । नाम दादू होगा । जयमल उन्हीं की आत्मा है ।"
गुरु जन छिपें न लोक में, आपहि हो विख्यात ।
जयमल माँ को मुकुन्द ने, सत्य सुनाई बात ॥१८॥

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