🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीसंतगुणसागरामृत०२* 🦚
https://www.facebook.com/DADUVANI
स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
.
*(“चतुर्थोल्लास” ४०/४२)*
.
*कथा समै यूं दुनिया आवै,*
*राजा प्रजा भीर करावे ।*
*जै जै कार सकल जग होई,*
*दादूराम कहै सब कोई ॥४०॥*
कई लोगो ने मौन ले लिया संतों के कथा कीर्तन में दुनिया खूब आती है राजा प्रजा की भीड़ करवाते हैं सारे संसार में हरि की दादूजी की जय जय कार हो रही है और सब कोई दादूराम का कीर्तन कर रहे हैं ॥४०॥
.
*को मौनी, को बोलै भारी,*
*कोऊ त्यागी, कोऊ घरवारी ।*
*किनहू त्यागे पिता महतारी,*
*किन हूं त्यागी गृह की नारी ॥४१॥*
जनता में कोई मौनव्रत लेकर भजन करता है, कोई जोर से बोलता है कोई सब तरह त्यागी है और कोई घर में रहकर साधना करता है । किसी ने अपने माता पिता को त्याग दिया और किसी ने अपनी नारी घरवाली को त्याग दिया ॥४१॥
.
*राजा का पुत्र बाग में रहै*
*त्यागी वैरागी बागि उछारैं,*
*नृप पुत्र रहें बाग मंझारी ।*
*अपने अपने ध्यान विचारै,*
*सुद्घसरूपी हृदै धारें ॥४२॥*
त्यागी वैरागी साधक बाग के बाहर निवास करते हैं और राजा एवं उनके पुत्र बाग के बीच में रहते हैं । साधक अपने अपने ध्यान में ब्रह्म विचार करते हैं और शुद्घ स्वरूप ब्रह्म को हृदय में धारण करते हैं ॥४२॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें