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🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*कोटि यत्न कर कर मुये, यहु मन दह दिशि जाइ ।*
*राम नाम रोक्या रहै, नाहीं आन उपाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ मन का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *मन*
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एक सेठ के यहां काम बहुत था इस कारण एक व्यक्ति ने उसे भूतोपासना बता कर कहा - "यह सिद्ध होने पर यह तुम्हारा सारा काम लेगा । सेठ ने सिद्ध कर लिया, भूत ने कहा - "मुझे तुम काम नहीं बताओगे तो मैं तुम्हें मार दूंगा । सेठ - "मेरे काम बहुत है ।"
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भूत काम करने लगा, सेठ के सब काम कर डाले अब कहने लगा - " काम बताओं नही तो मारता हुँ ।" काम बताना ही पड़ता । एक संत सेठ के घर आ गये उनसे प्रार्थना की, संत ने कहा - "घर के द्वार पर एक बहुत ऊंचा बांस गाड दो जब काम हो तब काम करालो, नहीं तो कह दो कि बांस पर चढो और उतरो यही काम है ।"
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इस युक्ति से सेठ ने भूत को जीत लिया । इसी प्रकार संत ईश्वर का नाम बताते हैं और कहते हैं - "जब काम हो तो करो नहीं तो मन से नाम जपो तथा काम करते हुये भी जप का अभ्यास करो । इससे मन पापमय संकल्प जो बारम्बार जन्म मृत्यु के हेतु है उनसे बच जायगा और ईश्वर प्राप्ति होगी ।
बिना काम मन भूत सम, देता है अति भीति ।
चित्त भूत भय हरन की, संत सिखावत रीति ॥१३॥

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