शुक्रवार, 4 सितंबर 2020

*नमो नमो कवि ईश*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*जे जन तेरे रंग रंगे, दूजा रंग नांही ।*
*जन्म सुफल कर लीजिये, दादू उन मांहीं ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ पद्यांश. १९९)*
================
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*नमो नमो कवि ईश, भये जेते सत त्रेता ।*
*द्वापर कलियुग आदि, तिरन तारन ततवेता ॥*
*नमो सु श्रुति अरु स्मृति, नमो सब शास्त्र पुरानन ।*
*नमो सकल वक्ता रु, नमो जे सुनत सु कानन ॥*
*मैं गम१ बिन ग्रंथ आरंभियो, कविजन करि हैं हासि ।*
*शिलहारे को को गिनै, जन राघव जिनके राशि ॥२२॥*
सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग में जो पहले हुये हैं, उन कवीश्वरों को तथा स्वयं संसार-सागर से तिरे हुये और शरणागतों को तारने वाले तत्ववेताओं को मैं बारंबार नमस्कार करता हूँ । 
श्रुति, स्मृति और सब शास्त्र तथा सब पुराणों को भी सम्यक प्रणाम करता हूँ । श्रुति आदि के सभी वक्ताओं को और जो श्रुति आदि को अपने श्रवणों से भली प्रकार सुनते हैं, उन सब को भी प्रणाम करता हूँ । 
मैंने ग्रंथ बनाने की योग्यता१ न होने पर भी ग्रंथ रचना रूप कार्य आरंभ कर दिया है, इससे कविजन अवश्य ही मेरा उपहास करेंगे । कारण-जिनके घर में अन्न की राशि पड़ी रहती है, उन लोगों में से शिला करने(खेतों में से दाना चुनने) वाले को अन्न वाला कौन गिनेगा? वैसे ही मैं तो भक्तों की कथायें जहां तहां से चुन कर संग्रह करूंगा अतः श्रेष्ठ कवियों में से मुझे कौन कवि गिनेगा ?
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें