🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
*सांई सौं साचा रहै, सतगुरु सौं सूरा ।*
*साधू सौं सनमुख रहै, सो दादू पूरा ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *गुरु*
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संत दादूजी के शिष्य बनवारीदासजी की शिष्य परम्परा में राणीला गांव के संत जमुनादासजी को उनके गुरु आदरामजी ने आज्ञा दी थी कि "मैं अब शरीर छोड़ता हूँ तू मेरे शव को अपने हाथों से टुकड़े टुकड़े कर के जनवरों को खिला देना जिससे शरीर काम में आ जाय । व्यर्थ भस्म करने से क्या लाभ है ।" जमुनादासजी ने वैसा ही किया था ।
गुरु आज्ञा पालन करे, सच्चे शिष्य अखण्ड ।
जमुनादास गुरु तन दिया, पक्षिन को कर खंड ॥४३॥

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