सोमवार, 7 सितंबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*दादू बुरा बुरा सब हम किया, सो मुख कह्या न जाइ ।*
*निर्मल मेरा सांइयाँ, ताको दोष न लाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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एक मनुष्य ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था कि - "प्रभो ! मेरे पापों को आप क्षमा करे ।"
उसे एक संत ने पूछा - "तेरा क्या पाप है ?"
वह बोला - "मेरा पाप बहुत बड़ा है जो मुख से कहा भी नहीं जा सकता ।"
सन्त - "तेरा पाप बड़ा है या पृथ्वी ?"
पापी - "मेरा पाप"।
सन्त - "तेरा पाप बड़ा है या आकाश ।"
पापी - "मेरा पाप ।"
सन्त - "तेरा पाप बड़ा है या प्रभु की दया ।"
पापी - "प्रभु की दया तो असीम है वह तो मेरे पाप से बड़ी है ।"
सन्त - "तू अपना पाप तो बता तो सही ?"
पापी - "मैं बड़ा धनवान् हूँ किन्तु याचक को आया देख कर कृपणता की अग्नि में जलने लगता हूँ ।"
संत - "तब तो तेरा पाप ही अवश्य बड़ा है ।"
सर्वपाप में कृपणता, पाप कहात महान ।
एक कृपाण से बचन यह, बोले संत सुजान ॥५९॥

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