🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
*दादू माया फोड़े नैन दोइ, राम न सूझै काल ।*
*साधु पुकारैं मेरू चढ़, देखि अग्नि की झाल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ माया का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *काम*
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गंगा किनारे एक तपस्वी विद्वान ब्राह्मण रहता था । एक दिन एक परम रूपमती युवती को देख, उसके पीछे हो लिया । स्त्री ने घर जाकर द्वार बंद कर लिये । ब्राह्मण ने आवाज दी - "तुम्हारा पति हूँ किवाड़ खलो ।" स्त्री ने किवाड़ खोले और एक बूढे ब्राह्मण को देखकर बोली - "तुम कौन हो ? और यहां क्यों आये हो ?" ब्राह्मण - "मैं काम से पीड़ित हूँ, तुम्हे बहुत धन दूंगा, तुम मुझसे संग करो ।" स्त्री - "मैं पतिव्रता हूँ और तुम हमारे धर्म संबंध से पिता हो, ऐसा मत कहो ।" फिर भी ब्राह्मण ने जबरदस्ती भीतर जाने के लिये सिर आगे बढाया । स्त्री ने जोर से दोनों किवाड़ बंद कर दिये । इससे सिर कट जाने से वह मर गया । फिर ज्ञात होने पर लोगों ने उसे जला दिया ।
नारि रूप आसक्त नर, होत मृत्यु का ग्रास ।
कथा सुनो इक विप्र की, शीध्र भया जो नास ॥१७॥

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