बुधवार, 16 सितंबर 2020

= ११२ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*सेवक की रक्षा करै, सेवक की प्रतिपाल ।*
*सेवग की वाहर चढै, दादू दीन दयाल ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
=================
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
########################
सदनाजी को जब शालीग्रामजी का परिचय मिला तब वे उन्हें लेने पुरषोतम क्षेत्र को जा रहे थे । मार्ग में एक दिन एक घर पर ठहरे । इनके रूप से मोहित हो, उस घर की स्त्री ने अपनी वासना पूर्ति के लिये कहा। इन्होंने ना कर दिया । तब उसने यह सोच कर कि यह पति के संकोच से नटता है, अपने पति का सिर काट कर बोली - "जो आपके प्रेम में बाधक था उसको मैंने नष्ट कर दिया है ।" फिर भी सदना ने नहीं माना । तब हल्ला करके सदना को पकड़ा दिया । नारी के पति की हत्या के दण्ड में सदना के हाथ काट दिये गये । भगवत् कृपा से फिर वे दोषी भी न ठहरे और हाथ भी पीछे आ गये ।
निर्दोषी को भय न हो, ईश्वर करत सहाय ।
सदना के कर कटे भी, पीछे निकले आप ॥१८८॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें