रविवार, 20 सितंबर 2020

*ब्रह्म हि ज्ञान दिखाय सबै जग*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*साँई साचा नाम दे, काल झाल मिट जाइ ।*
*दादू निर्भय ह्वै रहे, कबहूँ काल न खाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*ब्रह्म हि ज्ञान दिखाय सबै जग,*
*देव रिषभ्भ शरीर जरायो ।*
*वेद हरे मधु कैटभ दानव से,*
*हयग्रीव हन्यो श्रुति ल्यायो ॥*
*बालक आरन भक्ति करी अति,*
*धू वर दे राज करायो ।*
*रोग रु भोग भर्यो दुख से जग,*
*होय धनुंतर वैद्य सु आयो ॥१४॥*
१७. ऋषभदेव अवतार ने संपूर्ण जगत को ब्रह्म ज्ञान द्वारा मुक्ति का मार्ग और अपने शरीर को वनाग्नि में जला कर संतों की उच्च स्थिति का परिचय दिया । 
१८. मधु और कैटभ दोनों दानव ब्रह्मा से वेद हर ले गये थे तब वेदों की रक्षा के लिये हयग्रीव अवतार लेकर उन दोनों को मारा तथा उनसे वेद लाकर ब्रह्मा को दिया । 
१९. बालक ध्रुव ने वन में जाकर हरि की अत्यधिक भक्ति करी तब ध्रुव को दर्शन देने के लिये ध्रुव वरदाता प्रभु प्रकट हुये और ध्रुव को दर्शन देकर अचल रहने का वर दिया तथा राज्य करने का उपदेश देकर राज्य भी कराया । 
२०. अत्यधिक भोग भक्त होने से संसार के प्राणियों को रोग रूप दुःखों ने आ दबाया, तब सब को रोग-दुःखों से मुक्त करने के लिये भगवान् सुन्दर रूप में धन्वन्तरि वैद्य बन कर प्रकट हुये थे ।
(क्रमशः)

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