सोमवार, 21 सितंबर 2020

*च्यारि स्वरूप धरे सनकादिक*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
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*दादू नेड़ा परम पद, कर साधु का संग ।*
*दादू सहजैं पाइये, तन मन लागै रंग ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साधु का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*आतम ज्ञान उदित्त१ कियो जिन,*
*सो बद्रिनाथ सु खंड के स्वामी ।*
*ज्ञान कह्यो गुरु को यदुराज हि,*
*आनँद में दत्त अन्तरजामी ॥*
*मात मुकत्ति करी उपदेशि रु,*
*सांख्य सुनाय कपिल्ल सो नामी ।*
*च्यारि स्वरूप धरे सनकादिक,*
*एक दशा इक ही लछि२ प्रामी३ ॥१५॥*
२१. जिनने तपस्या के द्वारा आत्म ज्ञान प्रकट१ किया है, उन नारायण भगवान् का अवतार विशाला बेरड़ी के वन खंड में रहने से बदरीनाथ नाम से भी कहा जाता है । आप ही भागवत धर्म के आद्याचार्य हैं । 
२२. राजा यदु को अपने चौबीस गुरुओं का ज्ञान सुनाया था तथा जो निजानन्द में निमग्न रहते हैं वे अन्तर्यामी अवधूत ही दत्तात्रेय अवतार हैं । 
२३. जिनने सांख्य ज्ञान का उपदेश देकर अपनी माता को मुक्ति प्रदान की थी वे कपिल अवतार अति प्रसिद्ध हैं । 
२४. सनकादिक अवतार चार स्वरूपों में है-सनक, सनन्दन, सनातन, सनत्कुमार । इन चारों की अवस्था एक-सी है अर्थात् समान ही रहती है तथा प्राप्त३ करने योग्य लक्ष्य२ भी एक ही है ।
(क्रमशः)

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