🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🌷
भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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(#श्रीदादूवाणी ~ विश्वास का अंग १९ - २३/२५)
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*दादू सिरजनहारा सबन का, ऐसा है समरत्थ ।*
*सोई सेवक ह्वै रह्या, जहँ सकल पसारैं हत्थ ॥२३॥*
जो प्रभु संकल्प मात्र से संपूर्ण सृष्टि को पैदा कर देता है और सब कामना को पूर्ण करता है ऐसा बलशाली होकर भी सबको सेवक होकर अपनी कृपा से भरण पोषण करता है । फिर भी मूढ मनुष्य इसका भजन नहीं करते तो उनके जीवन को धिक्कार ही है ।
वेदान्त सन्दर्भ में- जिसका नाम याद कर लेने मात्र से संसार का नाश कर देता है तो हम उसके दिव्य नामों का सैंकड़ों वर्षों तक जप करते रहे ।
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*धनि धनि साहिब तू बड़ा, कौन अनुपम रीत ।*
*सकल लोक सिर सांइयां, ह्वै कर रह्या अतीत ॥२४॥*
हे परमेश्वर ! आप महान् हैं । क्योंकि सब लोकों के अधिपति होकर भी गुणदोषों से रहित हो । किसी के भी गुणदोषों को देखते भी नहीं और आपको कर्तृत्व का भी अभिमान भी नहीं होता । यह आपकी नीति अद्भुत है, इसके विषय में कोई क्या कह सकता है । हे प्रभु ! आपको बारम्बार धन्यवाद है आपकी दया को भी धन्यवाद है ।
भक्तिरसामृत सिन्धु में लिखा है- “परमात्मा का ईश्वरत्व यही है कि प्रकृति में स्थित होने पर भी असत् स्वरूप में स्थित उसके गुणों से उसमें रहने वाली बुद्धि के समान आप लिप्त नहीं होते । यह व्यतिरेक उदाहरण है अर्थात् जैसे प्रकृति अपने गुणों से लिप्त रहती है, उस प्रकार परमात्मा प्रकृति में रहते हुए भी उसके गुणों से लिप्त नहीं होते ।
गीता में भी लिखा है कि- “मैंने गुणकर्म विभाग से चारों वर्णों की सृष्टि बनाई है फिर भी लोकव्यवहार कर्ता होते हुए भी मैं पारमार्थिक दृष्टि से किसी का भी कर्ता नहीं हूँ, क्योंकि मैं अव्यय हूँ तथा न मैं बनता और बनाता हूँ । मुझे कोई भी कर्म का फल बांध नहीं सकता, न मुझे कर्म करने की इच्छा ही होती हैं । ऐसा जो जानता है, वह भी कर्मबंधन से मुक्त हो जाता है ।”
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*दादू हौं बलिहारी सुरति की, सबकी करै सँभाल ।*
*कीड़ी कुंजर पलक में, करता है प्रतिपाल ॥२५॥*
हे प्रभो ! आपकी स्मरण शक्ति को भी धन्यवाद है क्योंकि आप किसी को भी नहीं भूलते । कीट से लेकर ब्रह्मापर्यन्त प्राणियों को क्षणमात्र में ही अन्नजल देकर उनकी पालना करते हैं । अतः मैं आपके चरणकमलों में नमस्कार करके हाथ जोड़ता हुआ आपको बार-बार याद करता हूँ ।
(क्रमशः)

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