रविवार, 6 सितंबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*शूरा चढ़ संग्राम को, पाछा पग क्यों देहि ?*
*साहिब लाजै भाजतां, धृग् जीवन दादू तेहि ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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सत्यवान को यमराज बांधकर ले जाने लगे तब सावित्र भी उनके पीछे पीछे चली । यमराज ने उसे कई वर दिये(अंधे सास-ससुर को आँखें, खोया हुआ राज्य, उसके पिता को सौ पुत्र) और लौट जाने को कहा - जब नहीं लौटी तब यमराज ने फिर कहा - 'सत्यवान को छोड़ चाहे सौ वर और मांग लो' । सावित्री - 'मुझे सत्यवान से सौ पुत्र प्रदान करें ।' 
यमराज ने तथास्तु कह दिया । फिर यमराज आगे बढा तब सावित्री बोली - 'आपने मुझे सौ पुत्रों होने का वर दिया है । अब पति को कहां ले जाते है । पति के बिना पुत्र कैसे संभव है ।' यह सुनकर यमराज ने सत्यवान को छोड़ दिया ।
करत मृत्यु को भी विजय, सती शक्ति सत बात ।
निज पति को जिलवा लिया, सावित्र प्रख्यात ॥५४॥

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