शनिवार, 19 सितंबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*कर्म फिरावैं जीव को, कर्मों को करतार ।*
*करतार को कोई नहीं, दादू फेरनहार ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ समर्थता का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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सुर अमर है(मरते नहीं) तो भी राक्षस उनसे स्वर्ग छीन लेते हैं । पांचों पाण्डव महाबली थे, तो भी उन्हें वन को जाना ही पड़ा । लंका स्वर्ण की थी, तो भी घास के समान जली । राक्षस महाबली थे, तो भी कपियों ने मारा । चन्द्रमा अमृतमय है, तो भी क्षय रोग से पीड़ित है । नहुष इन्द्र होने पर भी सर्प बन गया । इत्यादि कथाओं से ज्ञात होता है कि कर्मों के आगे बल की हार ही होती है ।
कर्मों के आगे नहीं, चलती बल की बात ।
स्वर्ग सुरन से जाय अरु, पांडव वन को जात ॥३३॥

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