मंगलवार, 8 सितंबर 2020

= १०१ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*सतगुरु की समझै नहीं, अपणै उपजै नांहि ।*
*तो दादू क्या कीजिए, बुरी बिथा मन मांहि ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
=================
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
########################
• एक व्यक्ति सन्त के पास आकर बोला - "मुझे ब्रह्म का उपदेश दें ।"
• संत बोले - "तुम्हें मार्ग में कोई मिला था ?"
• उसने कहा - "एक गधा मिला था ।"
• संत - "अच्छा जाओ उस गधे को अपने मन से निकाल कर आओ फिर तुझे ब्रह्म का उपदेश दूंगा।"
वह गया, गधे को भूलने का प्रयत्न करने लगा किन्तु गधा प्रतिदिन अधिक दृढ होता गया ।
• फिर वह संत के पास आकर बोला - "गधा तो उलटा दृढ होता जा रहा है ।"
• संत - "जब दो दिन का गधा तुम न भूल सके तब अनादिकाल का संसार तुम कैसे भूलोगे और जब तक संसार न भूला जाय तब तक ब्रह्मज्ञान कहां है ।
सुपात्र को ही करत है, गुरु उत्तम उपदेश ।
गधा भूल आ फेरि मैं, दूंगा ब्रह्मोपदेश ॥१७॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें