🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*विघ्न बचें हरि नाम सौं, व्याधि विकार विलाय ।*
*ऐसा शरणा नाम का, सब दुख सहजैं जाय ॥*
*(श्री रज्जब वाणी)*
================
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*नमो विधि विविध प्रकार के रचनहार,*
*आदि तत्ववेत्ता तुम तात तिहूं लोक के ।*
*जप गुरु तपगुरु योग यज्ञ व्रत गुरु,*
*आगम निगम पति जाण१ सब थोक२ के ॥*
*नर पूज्य सुर पूज्य नाग हूं असुर पूज्य,*
*परम पवित्र परिहारी३ सर्व लोक के ।*
*उपजे कमल मध्य नाभि करतार की से,*
*राघो कहै मानियो महोला४ मम धोक५ के ॥३०॥*
विविध प्रकार की सृष्टि की रचना करने वाले ब्रह्माजी मैं आपको नमस्कार करता हूं । आप सभी ज्ञानियों से प्रथम होने वाले ज्ञानी हैं, तीनों लोकों के पिता हैं,
.
जप, तप, योग, यज्ञ और व्रतों का ज्ञान देने वाले आप ही गुरु हैं, आप ही वेद तथा शास्त्रों के स्वामी हैं अर्थात् उन पर आपका पूरा अधिकार है तथा आपको सभी समूहों२ के ज्ञान१ हैं ।
.
आप नर, सुर, नाग और असुरों के पूज्य हैं । परम पवित्र हैं तथा सर्व लोकों के सभी दोषों को मिटाने वाले हैं३ ।
.
आप भगवान् विष्णु के नाभि कमल से उत्पन्न हुये हैं मैं आप से प्रार्थना करता हूं-उक्त प्रकार किये हुये मेरे नमस्कार५ को स्वीकार करके आप मेरा उत्तरदायित्व४ ग्रहण अवश्य करेंगे अर्थात् मेरे भक्तमाल रचना रूप कार्य में कोई विघ्न नहीं हो तथा उसकी रचना उत्तम रीति से हो, यह जिम्मेदारी आप लेने की कृपा करेंगे ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें