सोमवार, 21 सितंबर 2020

= १२० =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*दादू साचे को झूठा कहैं, झूठे को साचा ।*
*राम दुहाई काढिये, कंठ तैं वाचा ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ निगुणा का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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संत रामराय जी दादूपंथी की एक पंडित निंदा करते थे । रामरायजी के पास दाँता गांव आदि के ठाकुर आया करते थे । उन्ही से पंडित को दो कोठी दिलवा दी और दो पेटियां बँधवा दिये । तब वह उनकी प्रशंसा करने लगा और एक दिन रामरायजी के पास जाकर भी प्रशंसा की । रामरायजी ने कहा - "यहां फिर नहीं आना घर ही रहो ।" 
पंडित घर पर भी प्रशंसा करता रहता था । इससे रामरायजी ने कोठियां छिनवाली और पेटियां भी बंद करवा दिये । पंडित रामरायजी के पास जाकर बोला - "मेरी जीविका छीन ली गई है । मेरे बच्चे अब क्या खायेंगे ?" रामरायजी "भाई ! जब तक तू हमारे कपड़े धोता था तब तक दिलवाई थी अब तू हमारे उपर कीचड़ उछालता है इससे बंद करवा दी ।"
निन्दक को दें जीविका, यह संतन की रीति ।
रामराय ने विप्र को, दिलवाई सह प्रीति ॥२१४॥

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