गुरुवार, 17 सितंबर 2020

= ११४ =

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*बाजीगर की पूतली, ज्यौं मर्कट मोह्या ।*
*दादू माया राम की, सब जगत बिगोया ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ माया का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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एक ब्राह्मण को एक गांव में दक्षिणा में बकरा मिला । वह उसे कंधे पर रखकर घर ले जा रहा था । मार्ग में तीन ठगों ने उसे देखा और बकरे को अपनी चतुराई से छीनना चाहा । ब्राह्मण के आगे जा मार्ग में दो दो फलांग की दूरी पर एक एक खड़े हो गये और ब्राह्मण को तीनों ने कहा - "तुम ब्राह्मण हो तम्हे शर्म नहीं आती जो एक कुत्ते को कंधे पर लादे फिरते हो ।" 
जब तीनों स्थान पर एक ही बात ब्राह्मण ने सुनी तब उसे भी संशय हो गया और उसने सोचा अवश्य आज मेरी दृष्टि में फर्क पड़ गया है, चालाक जजमान ने मुझे कुत्ता ही दे दिया है । बकरे को नीचे डाल नदी में स्नान कर लिया फिर घर चला गया । ठग बकरा लेकर रास्ते पड़े।
चतुराई कर अन्य को, ठगना ठगी कहाय ।
वंचक नर परिणाम में, उसका फल दु:ख पाय ॥१२२॥

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