बुधवार, 2 सितंबर 2020

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🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
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*शूरा झूझै खेत में, सांई सन्मुख आइ ।*
*शूरे को सांई मिले, तब दादू काल न खाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *कायरता*
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एक साधक ने एक संत से पूछा - "शीध्र से शीध्र भगवान मिलें ऐसा उपाय बतावें ।" सन्त ने कहा - "यदि तीन दिन तीन रात एक आसन पर बैठे रह कर निरंतर ध्यान करता रहे तो ईश्वर मिल जायेगा ।" वह एक पर्वत कन्दरा में जाकर बैठ गया । दूसरे दिन वहां कुछ कुत्ते, स्त्री और बच्चों के साथ एक भील आकर ठहर गया और इसके देखते देखते सब कुत्तों को मारकर खा गये । 
प्रात: बच्चों को मारकर खा लिया फिर स्त्री ने कहा - "अब यहां बैठे-बैठे क्या करते हो कहीं जाकर सांझ को खाने के लिये तो कुछ लाओ, नहीं तो भूखे मरोगे ।" भील - "भूखे क्यों मरेंगे ? तुझे दीखता नहीं है सामने बैठा तो है इसे मारकर खायेंगे ।" यह सुनकर साधक घबरा गया और उनकी आंख चुराकर भाग छूटा । वह भील आदि ईश्वर की माया थी । यदि वह साधक न भागता तो उसे अवश्य ईश्वर दर्शन हो जाते ।
कायर साधक से नहीं, होत साधना पूर्ण ।
बात भील की श्रवण कर, भाग गया तज तूर्ण ॥२५२॥

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