गुरुवार, 10 सितंबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*दादू साधु शब्द सौं मिल रहै, मन राखै बिलमाइ ।*
*साधु शब्द बिन क्यों रहै, तब ही बीखर जाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ शब्द का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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एक संत गांव के बाहर रहते थे । वे गांव मे एक संत के पास जाते और वहां सुने उन शब्दों को अपने आसन पर आकर मट्टी के घड़ों की ठीकरियों(टूकड़ों) पर लिखते रहते थे, कोई उन्हें पूछता "आप यह क्या करते हो ?" तो वे कहते - "मन का निग्रह करता हूँ ।"
संत शब्द से होत है, मन निग्रह सत जान ।
लिखते रहते संत इक, ठीकरि पर मतिमान ॥१६॥

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