शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

= १५७ =

🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
*जिन बातन तेरो छूटिक नाँहीं,*
*सोइ मन तेरे भायो ।*
*कामी ह्वै विषया संग लागो,*
*रोम रोम लपटायो ॥*
*कुछ इक चेति विचारि देखो,*
*कहा पाप जीय लायो ।*
*दादू दास भजन कर लीजे,*
*स्वप्नै जग डहकायो ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ पद्यांश. २५६)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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महाराज नहुष को जब इन्द्रपद प्राप्त हुआ तब कामवश हो इन्द्राणी के कहने से ऋषियों को पालकी में जोत कर इन्द्राणी के पास जाने लगे थे, किन्तु ऋषिशाप से बीच में ही सर्प होकर गिर पड़े । यह कथा महाभारत में प्रसिद्ध है । कामवश होने से ऋषियों को पालकी में जोतते हुए उनको लज्जा नहीं आई थी ।
कामी में रहती नहीं, किंचित भर भी लाज ।
मुनिगण पर चढ कर चले, लखो नहुष महाराज ॥५॥
### संत श्री नारायणदासजी पुष्कर अजमेर ॥ 

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