शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

= १५८ =

🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
*सकल भुवन भानै घड़ै, चतुर चलावनहार ।*
*दादू सो सूझै नहीं, जिसका वार न पार ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ माया का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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एक गरीब गूजरी एक श्रीमान के यहां छाछ बिलोने जाती थी और छाछ बिलोने के समय श्रीमान गूजर से कहती थी कि "तुम्हारी पुत्री का विवाह मेरे पुत्र से कर दो ।" गूजर बुद्धिमान था वह समझ गया कि - इसके इस वचन के कहने में कोई हेतु है । यह इसी स्थान पर बैठती है तभी यह वचन बोलती है । इसलिये इस स्थान को खोदकर देखना चाहिये । 
खोदा तो उसके नीचे अति मात्रा में धन निकला, धन निकाल लेने के बाद उस गुजरी ने फिर वह शब्द कभी नहीं कहा । इससे सिद्ध होता है कि पृथ्वी में गडे हुए धनरूप माया का प्रभाव भी व्यक्ति पर पड़ता है । बाहर का तो कहना ही क्या है ।
माया संगति से घमंड, होत है सत जान ।
सुन गरीब गुजरी वचन, समझ गया मतिमान ॥८॥

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