शनिवार, 31 अक्टूबर 2020

= १५९ =

🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
*दादू कोई काहू जीव की, करै आत्माघात ।*
*साच कहूँ संशय नहीं, सो प्राणी दोज़ख जात ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साँच का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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राजा दशरथजी को श्रवण के माता-पिता का शाप हुआ यह प्रसिद्ध है । महाराजा पाण्डु शिकार के लिये वन में गये थे। किमिन्द नामक ऋषि कामवश हुए और असमय होने से दोनों स्त्री पुरुष मृग बन कर रति सुख में लगे थे । पाण्डु ने उसी समय उनको बाण मारा । मृग रूप ऋषि मारा गया । मृग रूप ऋषि पत्नि मानवी बनी और राजा से बोली- "तुमने यह अनुचित कार्य किया है इसलिये अब जब तुम स्त्री संग करोगे उसी समय उसी क्षण मर जाओगे ।" वैसा ही हुआ । महाराजा परीक्षित को शमीक ऋषि के पुत्र श्रृँगी ऋषि का शाप हुआ कि "सातवे दिन तेरे को तक्षक काट लेगा ।" वह भी मृगयावश हो, प्यास से व्याकुल राजा के अयोग्य कार्य पर ही हुआ था । यह कथा अति प्रसिद्ध है ।
मृगया कभी न कीजिये, मृगया से अति हान ।
दशरथ पांडु रु परीक्षित, पाये शाप महान ॥१८१॥

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