शनिवार, 3 अक्टूबर 2020

*सनक सनन्दन सनातन सनत्कुमार*

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🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
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*वंदित तीनों लोक बापुरा, कैसे दर्श लहै ।*
*नाम निसान सकल जग ऊपर, दादू देखत है ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ स्मरण का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami* 
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*सनकादिक* 
*सनक सनन्दन सनातन सनत्कुमार,*
*करत तमारि१ त्रय लोक मध्य ज्ञान को ।*
*बालक विराजमान शोभे सनकादि ऐसे,*
*प्रातः मुख शेष कथा सुनत नित्यान२ को ॥*
*मन वच कर्म मध्य वासर३ विशेष कर,* 
*धारत विचार सार शंभूजी के ध्यान को ।*
*राघो सुनैं साँझ काल विष्णुजी के बैन बाल,*
*रहैं छक४ ऋतु श्रुति वृत्ति पान को ॥३९॥*
सनक, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार ये चारों ब्रह्मा जी के पुत्र हैं और तीनों लोकों में ज्ञान रूप सूर्य१ को उदय करने वाले हैं अर्थात् ज्ञान द्वारा अज्ञान रूप अंधकार को मिटाने वाले हैं । सनकादिक बैठे हुये ऐसे शोभा देते हैं मानों बालक ही विराजे हों । प्रातःकाल नित्य२ ही शेषजी के मुख से भगवत् कथा सुनते हैं, 
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मध्यान्ह में प्रतिदिन३ मन, वचन, कर्म से भगवान् शंकर जी के सार रूप विचार ध्यानपूर्वक सुनकर विशेष रूप से धारण करते हैं तथा सायंकाल में प्रतिदिन भगवान् विष्णुजी के वचन सुनते हैं । इस प्रकार बालक रूप से छः ओं ऋतुओं में ही श्रोत्र वृत्ति द्वारा कथा रस का पान करते हुये ब्रह्मानन्द में तृप्त४ रहते हैं ।
(क्रमशः)

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