गुरुवार, 8 अक्टूबर 2020

पीव पहिचान का अंग २० - २३/२५

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🌷
भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ @महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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(#श्रीदादूवाणी ~ पीव पहिचान का अंग २० - २३/२५)
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*जाती नूर अल्लाह का, सिफाती अरवाह ।*
*सिफाती सिजदा करै, जाती बेपरवाह ॥२३॥*
जीव ब्रह्म का लक्षण कह रहे हैं- ब्रह्म शुद्ध प्रकाशमय सत्य निराश्रय होता है । जीव गुणों से बंधा हुआ नाना विकार वाला होता है । तथा अपने कल्याण के लिये भगवान् की स्तुति करता है, और परमेश्वर निरपेक्ष होता है ।
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*परम तेज परापरं, परम ज्योति परमेश्‍वरं ।*
*स्वयं ब्रह्म सदई सदा, दादू अविचल स्थिरं ॥२४॥*
*अविनाशी साहिब सत्य है, जे उपजै विनशै नांहि ।*
*जेता कहिये काल मुख, सो साहिब किस मांहि ॥२५॥* 
परब्रह्म परमात्मा चैतन्यमय, मायातीत, प्रकाशस्वरूप, निष्क्रिय सदा एक रस, अविचल, सुस्थिर, अविनाशी, सत्य, उत्पत्ति विनाश रहित, निरंजन निराकार होता है । जो स्वर्ग ही कालग्रस्त होता है । जन्मता मरता है, वह मिथ्याभूत होने से ब्रह्म नहीं हो सकता । क्योंकि उसके नेत्र अविद्या से बंधे हुए हैं ।
(क्रमशः) 

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