शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2020

*विष्णु वल्लभ की चरण रज*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
*पीव रोम रोम दुख सालै, इन पीरों पिंजर जालै,*
*जीव जाता क्यों ही बालै ॥*
*पीव सेज अकेली मेरी, मुझ आरति मिलणै तेरी,*
*धन दादू वारी फेरी ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ पद्यांश. ९८)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*मूल छप्पय -*
*विष्णु वल्लभ की चरण रज,*
*निशि दिन प्रारथना करूं ॥*
*लक्ष्मि विहंग१ सुनन्द,*
*आदि षोडश रूचि हरि पग ।*
*सुग्रीव हनुमान जाम्वन्त,*
*विभीषण शबरी खग२ ॥*
*सुदामा विदुर अक्रूर,*
*ध्रुव अम्बरीष सु ऊधौ ।*
*चित्रकेतु चन्द्रहास,* 
*ग्राह गज कियो सूधो ॥*
*द्रुपद-सुता कौखारवै३,* 
*राघव सबको उर धरूं ।*
*विष्णु वल्लभ की चरण रज,*
*निशि दिन प्रारथना करूं ॥४७॥*
लक्ष्मी, गरुड़, और जिनकी हरि चरणों में अत्यधिक प्रीति है वे सुनन्द आदि षोडश पार्षद, सुग्रीव, हनुमान्, जाम्बवान्, विभीषण, शबरी, जटायु२, सुदामा, विदुर, अक्रूर, ध्रुव, अम्बरीष, उद्धव, चित्रकेतु, चन्द्रहास, और जिनने हरि की ओर अपना मुख सीधा किया अर्थात् सन्मुख हुये वे ग्राह और गज, द्रौपदी, मैत्रेय मुनि, इन सब की चरण रज संसार से पार करने वाली है, इसलिये इनका हृदय में ध्यान करके प्रार्थना करता हूँ-मेरे को भी संसार से पार करने की कृपा अवश्य करना ।
(क्रमशः)

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