🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
🌷 #०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु 🌷
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*जो मति पीछे ऊपजै, सो मति पहली होइ ।*
*कबहुं न होवै जीव दुखी, दादू सुखिया सोइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ विचार का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *हठ*
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हठ करने से अनसमझ तांगे के घोड़े को भी पिटना पड़ता है, तब मनुष्य पिटे इसमें तो कहना ही क्या है ? इसलिये विचार करके ही कार्य करना चाहिये, हठ नहीं करना चाहिये ।
पशु भी हठ से मार ही, लहैं प्रगट यह बात ।
तांगे का घोड़ा अड़े, चाबुक असंख्य खात ॥१०६॥

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