गुरुवार, 15 अक्टूबर 2020

*राघव राम मिलाव ही, अंतकाल परमारथी*

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*धरती अम्बर रात दिन, रवि शशि नावैं शीश ।*
*दादू बलि बलि वारणें, जे सुमिरैं जगदीश ॥*
*जे जन राते राम सौं, तिनकी मैं बलि जांव ।*
*दादू उन पर वारणे, जे लाग रहे हरि नांव ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ साधू का अंग)*
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*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
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*षोडश पार्षद* 
*मूल छप्पय-*
*राघव राम मिलाव ही, अंतकाल परमारथी ॥*
*नन्द सुनन्द प्रबल बल, कुमुद कुमुदाक्ष सु भारी ।*
*चंड प्रचंड जय विजय, विराजैं भले सु द्वारी ॥*
*विष्वकसेन सुषेन, शील सुशील सुनीता ।*
*भद्र सुभद्र गुणज्ञ, गाइये परम पुनीता ॥*
*येते षोडश पारषद, भक्त भजन के सारथी ।*
*राघव राम मिलाव ही, अंतकाल परमारथी ॥४६॥*
१.नन्द, २.सुनन्द, ३.प्रबल, ४.बल, ५.कुमुद, ६.सुमहान् कुमुदाक्ष, ७.चंड, ८.प्रचंड, और भली प्रकार वैकुण्ठ के द्वार पर विराजने वाले ९.जय, १०.विजय, ११.विष्वकसेन, १२.सुषेन, १३.शील, और सुन्दर नीति वाले १४.सुशील, १५.भद्र, और १६.गुणों के ज्ञाता सुभद्र जी । ये षोडश ही परम पवित्र रूप से गाये जाते हैं वा इनका परम पुनीत यश गाना चाहिये । तथा षोडश ही भक्तों के भजन रूप रथ के चलाने वाले सारथि हैं अर्थात् भक्तों को भजन रूप साधन में सहायता देते हैं । तथा अंतकाल में ये १६ परमार्थी पार्षद भगवान् से मिला देते हैं । इन्होंने ही अजामिल की प्रभु से मिलाया था यह तो अति प्रसिद्ध ही है ।
(क्रमशः)

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