🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🌷
भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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(#श्रीदादूवाणी ~ विश्वास का अंग १९ - ५५/५८)
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*दादू रोजी राम है, राजिक रिजक हमार ।*
*दादू उस प्रसाद सौं, पोष्या सब परिवार ॥५५॥*
मेरा भाग्य तो राम ही है, मेरी आजीविका(जीवन का साधन) है । उसके कृपा प्रसाद से ही मेरा इन्द्रियरूपी परिवार तथा मेरा पालन हो रहा है । मैं तो केवल दृढ़ विश्वास के साथ उसका भजन ही करता हूँ ।
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*पंच संतोषे एक सौं, मन मतिवाला मांहि ।*
*दादू भागी भूख सब, दूजा भावै नांहि ॥५६॥*
भगवद् भक्ति के कारण मेरा मन भगवान् के प्रेम रस में डूबा रहता है । उन्हीं की कृपा से मैंने अपनी इन्द्रियों को जीत रखा है । उनकी कृपा से ही मेरी सारी कामना निवृत्त हो गई । अब मैं भगवान् को छोड़ कर किसी की भी इच्छा नहीं करता हूँ ।
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*दादू साहिब मेरे कापड़े, साहिब मेरा खाण ।*
*साहिब सिर का ताज है, साहिब पिंड प्राण ॥५७॥*
हे प्रभो ! आप ही मेरे वस्त्र हैं । अर्थात् वस्त्र की तरह आपको मैंने धारण कर रखा है । आप ही मेरे भोजन हैं । अर्थात् भोजन की तरह मेरे प्राणों की रक्षा करने वाले हो । आप ही मेरे शिर के मुकट हैं । शिर पर भी आप की आज्ञा को ही मुकट की तरह धारण कर रखी है और अधिक क्या कहूं, प्राण भी आप ही हैं । अर्थात् आपकी भक्ति के लिये ही मैंने प्राणों को धारण कर रखा है ।
किसी कवि ने लिखा है कि- हे भगवन् ! आप ही मेरे माता पिता भाई बान्धव, मित्र, विद्या, धन हैं । क्या कहूं ? मेरे तो आप ही देवाधिदेव हैं । अतः मैं आपकी भक्ति मय भक्त हूँ ।
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*सांई सत संतोष दे, भाव भक्ति विश्वास ।*
*सिदक सबूरी साँच दे, माँगे दादू दास ॥५८॥*
इस पद्य में श्रीदादू जी महाराज कल्याण के साधनों की प्रार्थना कर रहे हैं कि हे प्रभो आप मुझे सच्चा संतोष सुविचार अनन्य भक्ति दृढ़ विश्वास सत्य वचन मिताहार की बुद्धि प्रदान करें । जिससे मैं इन साधनों से आपको प्राप्त कर सकूं । लिखा है कि- संतोष ही सबसे बड़ा स्वर्ग है । संतोष में ही सुख है । संतोष से बढ़कर कोई दूसरा साधन नहीं है । जिसने क्रोध हर्ष आदि को त्याग दिया उसके आगे सिद्धियां स्वयमेव पहुंच जाती है ।
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*॥ इति विश्वास के अंग का पं. आत्माराम स्वामी कृत भाषानुवाद समाप्त ॥१९॥*
(क्रमशः)

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