शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2020

= १५५ =

🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
🌷 #०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू निन्दा किये नरक है, कीट पड़ैं मुख मांहि ।*
*राम विमुख जामै मरै, भग-मुख आवै जाहि ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ निन्दा का अंग)*
=================
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *निन्दा*
########################
एक समय संत हरिदासजी सप्तगांव के जमीदार हिरण्य मजूमदार के यहां हरिनाम स्मरण की महिमा करते हुये बोले - "हरिनाम से मनुष्य परम पवित्र हो जाता है ।" यह सुनकर जमीदार के गोपाल चक्रवती नामक एक कर्मचारी ने हरिनाम की निंदा करते हुये कहा - "ये सब भावुकता की बातें है । यदि हरिनाम से मनुष्य की नीचता मिट जाय तो मैं अपनी नाक कटवा लूं ।" संत हरिदासजी ने कहा - "यदि नाम से मुक्ति न मिले तो मैं भी अपनी नाक कटवा लूं ।" फिर दो तीन मास बाद कुष्ट रोग से गोपाल का नाक गल कर गिर गया ।
निन्दा कीन्हें नाम की, होती हानि महान ।
चक्रवर्ति गोपाल की, नाक कटी थी जान ॥२१२॥

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें