सोमवार, 5 अक्टूबर 2020

*(“पंचमोल्लास” १/३)*

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स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्‍वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
*(“पंचमोल्लास” १/३)*
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*पदमसिंघ* 
*ऐसें सुणी पदमसिंघ राई,*
*गयो प्रधान सुधि नहीं काई ।* 
*घोरे गये गयौ प्रधान,*
*गये सिपाही असल सुजान ॥१॥* 
राजा पदमसिंघ ने सुना कि जो प्रधान संत को पकड़ने गया था उसका कोई अता पता सूचना नहीं है अच्छे अच्छे घोडे़ भी गये और प्रधान भी गया उसके साथ ही समझदार और सुजान सिपाही भी चले गये जिनका पता नहीं ॥१॥ 
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*हमको बात इहै न भाई,*
*कीजे जतन सु भाखे राई ।* 
*जे कोई उनि संतन कूं मारू,*
*ताकूं तुरत करुं सिरदारू ॥२॥* 
हमको यह बात समझ में नही आई कि ऐसा कौन सा प्रयत्न करे जिससे प्रधान राई का पता चल जावे । जो कोई आदमी उन संतों को मारेगा उसको मैं सरदार बना दूंगा ॥२॥ 
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*संतों को मारने के लिये च्यार चौरों को भेजा*
*जो कोई आवै तिनकूं मारी,*
*ताकूं करु आप अधिकारी ।*
*तस्कर जनां चार तब आया,*
*वचन कह्यो राजा सुख पाया ॥३॥* 
जो कोई उन संतों को मारकर आवेगा उसको मैं अपने राज्य में बडा अधिकारी छोटा राजा बना दूंगा । यह बात सुनकर चार चोर राजा के पास आये और कहा कि हम उन संतों को मार कर आवेंगे, तो राजा बड़ा प्रसन्न हुआ ॥३॥
(क्रमशः)

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