रविवार, 11 अक्टूबर 2020

*सीय स्वरूप बना इन फेरउ*

🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 卐सत्यराम सा卐 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 #भक्तमाल 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
भक्त भेख धरि मिथ्या बोलै, निंदा पर अपवाद ।
साचे को झूठा कहै, लागै बहु अपराध ॥
(#श्रीदादूवाणी ~ चितावणी का अंग)
=================
सौजन्य ~ #भक्तमाल, रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान
साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा, साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami
.
सीय स्वरूप बना इन फेरउ,
राम निहार नहीं मन आई ।
आय कही शिव से जिमि की तिमि,
आंच लगी खिज के समझाई ॥
रूप धर्यो मम स्वामिन को शठि,
त्याग कर्यो तन सोच न माई ।
भाव भरे शिव ग्रन्थ धरे जन,
बात सु प्यारनि रीझ सु गाई ॥२३॥
सती  जी ने सोचा था कि सीताजी का स्वरूप बनाकर इन्हें लौटा लूंगी किन्तु राम तो  सर्वज्ञ थे जान गये कि यह सती हैं । सती को सीता के रूप में देखकर राम के  मन में कोई भी मोहित करने वाली बात नहीं आई । फिर सतीजी ने शिव के पास आकर  रामजी की परीक्षा जिस प्रकार की थी वह बात ज्यों की त्यों सुनादी । उसके  सुनने से शिवजी के हृदय में अग्नि सी लग गई अर्थात् उन्हें बड़ा दुःख हुआ  फिर ....
उनने  क्रोध पूर्वक सतीजी को समझाते हुये कहा- तुमने मेरी स्वामिनी सीता जी का  रूप धारण किया है यह शठता पूर्ण कार्य किया है । इसीलिये मैंने तुम्हारे इस  शरीर से पत्नी भाव को त्याग दिया है । यह सुनकर सतीजी सोच में नहीं समाई  अर्थात् उनको अत्यधिक चिन्ता हुई । उक्त प्रकार प्रभु-भाव से भरे हुये  शिवजी के हृदय को धन्य हैं । भक्तों ने शिवजी के उक्त भाव अपने ग्रंथों में  धरे हैं तथा यह सुन्दर कथा भगवत् प्रिय जनों ने भी प्रसन्न होकर सुन्दर  ढंग से गाई है ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें