🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
🦚 #श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका 🦚
https://www.facebook.com/DADUVANI
भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
(#श्रीदादूवाणी ~ समर्थता का अंग २१ - ५/८)
.
*दादू कर्त्ता करै तो निमष में, ठाली भरै भंडार ।*
*भरिया गह ठाली करै, ऐसा सिरजनहार ॥५॥*
जो प्रभु जिन धनवानों के धन से भरे हुए भण्डार हैं उनको क्षण भर में खाली कर देते हैं और जिनके पास कुछ भी नहीं है, उन निर्धनों को धनवान बना देते हैं । उस भगवान् की महिमा को कौन जान सकता है ? कोई भी नहीं ।
इसी भाव को लेकर आलविन्दारस्तोत्र में लिखा है कि- जिसकी महिमारूप समुद्र के छोटे से छोटे जल कण का भी मान बतलाने को शिव और ब्रह्मा आदि देवता समर्थ नहीं है । उन्हीं की महिमा का स्तवन करने के लिये उद्यत हुए मुझ निर्लज्ज कवि को नमस्कार है । भला मैं उनकी महिमा को क्या जानूं ?
.
*दादू धरती को अम्बर करै, अम्बर धरती होइ ।*
*निशि अँधियारी दिन करै, दिन को रजनी सोइ ॥६॥*
जिसकी इच्छा से पृथिवी आकाश बन जाता है, तथा आकाश पृथ्वी बन जाती है, दिन रात और रात, दिन बन जाते हैं । उसकी महिमा को कौन जान सकता है ?
लिखा है कि- मैं असमर्थ होने पर भी अपने परिश्रम और बुद्धि के अनुसार स्तुति करूंगा, क्योंकि सदा स्तुति करने वाले वेद और ब्रह्मा आदि देवता भी श्रम और बुद्धि के अनुसार ही स्तुति करते हैं । (पूरी स्तुति तो उनसे भी नहीं बन सकती) तो फिर उनमें और मेरे में क्या विशेषता हुई ? कुछ भी नहीं, भला महासागर के बीच डूबते हुए परमाणु और कुलाचल में क्या अन्तर है ।
.
*दादू मृतक काढ मसाण तैं, कहु कौन चलावै ।*
*अविगत गति नहिं जाणिये, जग आन दिखावै ॥७॥*
मरे हुए पुरुष को कोई भी जिन्दा करके नहीं चला सकता किन्तु परमात्मा अपनी अलौकिक शक्ति द्वारा मरे हुए को भी जिला सकता है । अतः उसकी गति को कौन जान सकता है ? वह अविगत माना गया है ।
लिखा है कि- आसुरी प्रकृति वाले पुरुष, आपके लोकोत्तर शीलरूप चरित्र परम उत्तम सत्त्वगुण, और सात्विक स्वभाव द्वारा आपको प्रबल शास्त्रों तथा देवसम्बन्धी परमार्थ को जानने वाले विख्यात पाराशरादि महर्षियों के सिद्धान्तों से भी यथावत् नहीं जान सकते ।
.
दादू गुप्त गुण परगट करै, परगट गुप्त समाइ ।
पलक मांहि भानै घड़ै, ताकी लखी न जाइ ॥८॥
जिनके गुण विख्यात हैं, उनको गुप्त कर देते हैं । तथा जिनके गुप्त गुण हैं, उनको कृपामयी दृष्टि से विख्यात गुण वाले बना देते हैं । क्षण मात्र में संसार की उत्पत्ति विनाश कर देते हैं । अतः उनके अपार सामर्थ्य को कौन जान सकता है ? लिखा है कि-जिसमें सारी पृथ्वी परमाणु रूप जल एक छीटें के समान तेज तुच्छ चिनगारी, वायु मन्द निःश्वास मात्र आकाश क्षुद्र सुराक के समान और शिव ब्रह्मा आदि देवता तुच्छ कीड़े के समान दीख पड़ते हैं । ऐसे आपके चरणरेणु के कण की बलिहारी हो ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें