🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*काया कठिन कमान है, खांचै विरला कोइ ।*
*मारै पंचों मृगला, दादू शूरा सोइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
=================
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,*
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान*
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*भीष्म*
*गगन१ मगन महा गांगेय गंगा से भयो,*
*देख सुत शान्तनु प्रवीन पर वार्यो है ।*
*धीवर की कन्या मांग जिणत२ प्रणायो जिन,*
*प्रथम परमार्थी पिता के काज आयो है ॥*
*ब्याह तज्यो बल तज्यो, राज तज्यो रोस तज्यो,*
*धन्य धन्य जननी गांगेय जिन जायो है ।*
*राघो कहै शील को सुमेरु है गांगेय गुरु,*
*काछ३ बाच निष्कलंक मोक्ष पद पायो है ॥४२॥*
भीष्म जी ब्रह्म१ चिन्तन रूप रस में निमग्न रहने वाले महाभक्त हैं । ये राजा शान्तनु द्वारा गंगा के गर्भ से आठवें वसु के अंश से उत्पन्न हुये थे । धर्म में प्रवीण शान्तनु पुत्र देवव्रत ने सत्यवती की प्राप्ति के लिये पिता की जो दशा हुई थी उसे देख कर अपने तन मन को पिता पर वार दिया था अर्थात् पिता का दुःख जैसे भी दूर हो वैसे ही करने का निश्चय कर लिया था ।
.
जिनने स्वयं जाकर दासराज की पुत्री को अपनी माता के रूप में मांगा और उसका२ विवाह पिता से करवाया था । इस प्रकार परमार्थी भीष्म जी प्रथम पिता के हित का कार्य करने में ही संलग्न हुये थे और उसके लिये आपने विवाह, बल, राज्य तथा क्रोध भी त्याग दिया था अर्थात मैं विवाह नहीं करूंगा, बल से सत्यवती की संतान को नहीं सताऊंगा, राज्य नहीं करूंगा और न सत्यवती की संतान पर क्रोध ही करूंगा ।
जिस गंगा माता ने भीष्म जी ने उत्पन्न किया है उसे बारंबार धन्यवाद है । गंगा पुत्र भीष्म जी ब्रह्मचर्य३ तथा शील स्वभाव के तो मानों सुमेरु ही हैं । गुरु भीष्म जी ने कभी भी अपने ब्रह्मचर्य व्रत तथा अपनी वाणी में कोई भी प्रकार का कलंक नहीं आने दिया था और अंत में मोक्ष पद ही प्राप्त किया था ।
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें