🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*सूरज सन्मुख आरसी, पावक किया प्रकास ।*
*दादू सांई साधु बिच, सहजैं निपजै दास ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
=================
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *बुद्धि*
########################
संत सुन्दरदास जी जब बच्चे ही थे तब दादूजी के निर्वाण उत्सव पर एक सभा में संत गरीबदासजी सुन्दरदासजी को निरा अबोध बालक जानकर उनका उपहास किया था । उसका उत्तर बालक सुन्दरदास जी ने भरी सभा में निर्भिकता के साथ कवितावद्ध दिया । उसे सुनकर सब सभा उसकी बुद्धि की विलक्षणता देख कर हर्षित हुई थी । बिना पढे लिखे ऐसे उत्तर देने की शक्ति पूर्व साधन बिना नहीं आती । सुन्दरदास जी पूर्व में जग्गा नामक दादूजी के ही शिष्य थे ।
पूर्व साधन शक्ति के, बुद्धि विलक्षण होय ।
सुन्दर बालक के वचन, सुन हर्षे सब कोय ॥७१॥

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें