मंगलवार, 3 नवंबर 2020

*नाम लिख्यो शिर राम शिरोमणि*

🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🙏🇮🇳 *卐सत्यराम सा卐* 🇮🇳🙏
🌷🙏🇮🇳 *#भक्तमाल* 🇮🇳🙏🌷
https://www.facebook.com/DADUVANI
*दादू दरिया यहु संसार है, तामें राम नाम निज नाव ।*
*दादू ढील न कीजिये, यहु औसर यहु डाव ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ स्मरण का अंग)*
=================
*सौजन्य ~ #भक्तमाल*, *रचनाकार ~ स्वामी राघवदास जी,* 
*टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान* 
*साभार ~ श्री दादू दयालु महासभा*, *साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ*
*मार्गदर्शक ~ @Mahamandleshwar Purushotam Swami*
.
*नाम लिख्यो शिर राम शिरोमणि,*
*पार करै सति-भाव उचारै ।*
*ठौर वही नर रूप भयो फिर,*
*झ्याज हु आय गई सु किनारै ॥*
*जान लियो वह पूछत है सब,*
*बात कही इन लेहु विचारै ।*
*कूद पर्यो जल देख कुबुद्धिन,*
*जाय चल्यो हरि नाम उधारै ॥३१॥*
उस मानव के ललाट पर सर्व शिरोमणि भगवान् राम का नाम लिखकर सच्चे भाव से कहा- यह सागर से पार उतार देगा । फिर वह मानव जल पर स्थल के समान चलता हुआ साधारण नर के रूप में उसी स्थान पर आ गया जहां इसको पटकने वाला जहाज लौटकर किनारे आ गया था । 
जहाज वालों ने इसे पहचान लिया और जहाज पर बैठा लिया किन्तु इसका तेज पूर्व से अधिक था । पूछने पर उसने अपनी उक्त कथा सुना दी, तब जहाज वाले मन में विचारने लगे, इसकी संपत्ति छीननी चाहिये । उन लोगों की कुबुद्धि को देखकर वह पुनः जल में कूद पड़ा और जल पर स्थल के समान चलने लगा । इससे सबको निश्चय हो गया की-हरि का नाम संसार-सागर से पार कर देता है तब इस समुद्र से पार कर दे इसमें तो कहना ही क्या है ?
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें