🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
*झूठे अंधे गुरु घणे, भरम दिढ़ावैं काम ।*
*बँधे माया मोह सौं, दादू मुख सौं राम ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ गुरुदेव का अंग)*
=================
साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
.
*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *गुरु*
########################
एक व्यक्ति एक महन्त के पास शिष्य होने का परामर्श करने लगा कि मैं किस का शिष्य बनूं । महन्त ने अपने धन धाम आदि का परिचय देकर कहा - "मुझसे अधिक योग्य गुरु तुम्हे और नहीं मिलेगा, मेरे ही बन जाओ ।" व्यक्ति विचारशील था चुपचाप उठ कर चला गया । उपयुर्क्त के समान जो प्रेरणा कर के शिष्य बनावे सो भी गुरु नहीं ।
धनआदिक का लोभ दे, सो भी गुरु हैं नांहिं ।
सुमति शिष्य धन बात सुन, उठ गया क्षण माँहिं ॥३२॥

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें