🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*#श्रीदादू०अनुभव०वाणी, द्वितीय भाग : शब्द*
*राग भैरूँ २४(गायन समय प्रात:काल)*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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३९५ - दादरा
हिन्दू तुरक न जानूँ दोइ ।
साँई सबन का सोई है रे,
और न दूजा देखूँ कोइ ॥टेक॥
कीट पतँग सबै योनिन में,
जल थल संग समाना सोइ ।
पीर पैगम्बर देवा दानव,
मीर मलिक मुनिजन को मोहि॥१॥
कर्ता है रे सोई चीन्हौं,
जनि१ वै क्रोध करै रे कोइ ।
जैसे आरसी मँजन कीजै,
राम रहीम देही तन धोइ ॥२॥
सांई केरी सेवा कीजै,
पायो धन काहे को खोइ ।
दादू रे जन हरि जप लीजै,
जन्म जन्म जे सुरजन२ होइ ॥३॥
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हिन्दू - मुसलमान, दो मत समझो, सब का उत्पन्न करने वाला वह एक ही परमात्मा है और किसी दूसरे को मैं नहीं देखता ।
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जल तथा स्थल के कीट पतँगादि सभी योनियों में वह ईश्वर समाया हुआ रह कर साथ रहता है । पीरों, पैगम्बरों, देवताओं, दानयों, सरदारों, बादशाह और मुनिजनादि सबको वह मोहित करता है ।
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वास्तविक कर्ता जो ईश्वर है, उसी को पहचानो । बिना विचार एक पक्ष को पकड़ कर कोई किसी पर क्रोध न१ करें । जैसे दर्पण को माँजकर साफ करने से मुखादि शरीर ठीक दीखता है, वैसे ही अन्त:करण को भजन द्वारा माँजकर पवित्र करो, फिर राम और रहीम एक ही भासेंगे ।
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इस प्रकार निष्पक्ष मध्य मार्ग - द्वारा परमात्मा की भक्ति करो । मानव देह रूप धन प्राप्त होने पर भी इसे व्यर्थ विषयों में क्यों खो रहे हो ? हे जनो ! जो परमात्मा तुम्हारे प्रति - जन्म में सहायक होते हैं, उन्हीं हरि का नाम जप कर उन्हें प्राप्त कर लो, तब ही बार - बार के जन्मजात जग - जँजाल के बन्धन से तुम्हारा निर्विवाद सुलझन२ होगा अर्थात् आवागमन मिटने से यह मानव - जन्म सफल होगा ।
(क्रमशः)

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