रविवार, 1 नवंबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
*दादू काल रूप मांही बसै, कोई न जानै ताहि ।*
*यह कूड़ी करणी काल है, सब काहू को खाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ काल का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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एक नदी में एक सर्प एक मेंढक को पकड़ कर उसे खाने के लिये नदी तट जा रहा था । सर्प के मुख में भी पड़ा मेंढका मच्छरों को खाने के लिये मुख फाड़ रहा था ।
विषयी काल मुख में पड़ा, तदपि विषय हित धाय ।
व्याल बदन में मेंढका, मच्छरन को ललचाय ॥१५०॥

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