🌷🙏🇮🇳 *卐 सत्यराम सा 卐* 🇮🇳🙏🌷
*#श्रीदादू०अनुभव०वाणी, द्वितीय भाग : शब्द*
*राग भैरूँ २४(गायन समय प्रात:काल)*
टीका ~ संतकवि कविरत्न स्वामी नारायणदास जी महाराज, पुष्कर, राजस्थान ॥
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३९६ - मदन ताल
को स्वामी को शेख कहै,
इस दुनियां का मर्म न कोई लहै ॥टेक॥
कोई राम कोई अलह सुनावै,
पुनि अलह राम का भेद न पावै ॥१॥
कोई हिन्दू कोई तुर्क कर मानैं,
पुनि हिन्दू तुर्क की खबर न जानैं ॥२॥
यहु सब करणी दोनों वेद,
समझ परी तब पाया भेद ॥३॥
दादू देखै आतम एक,
कहबा सुनबा अनँत अनेक ॥४॥
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हिन्दू - सँत को स्वामी और मुस्लिम सँत को शेख कहते हैं, ऐसे नाम भेदों में ही हम फंस रहे हैं । इस सँसार में मानव - जन्म का जो भगवत् - प्राप्ति रूप रहस्य है, उसे कोई नहीं जानता ।
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कोई राम और कोई अल्लाह सुनाते हैं, किन्तु अल्लाह और राम के सुनाने का जो एक ही रहस्यमय फल है, उसको नहीं पहचान पाते और भ्रमवश एक दूसरे से ईर्ष्या करते हैं ।
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कोई अपने को हिन्दू और कोई मुसलमान मानते हैं, किन्तु हिन्दू और मुसलमान पने का क्या रहस्य है, इसका कुछ भी वृत्तान्त नहीं जानते ।
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ये उक्त वो सभी भेद रूप कर्म का व्यवहार - मय ज्ञान इन दोनों हिन्दू - मुसलमानों में है ।
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हिन्दू भी अनन्त विचार कहते - सुनते हैं तथा मुसलमान भी अनेक बातें कहते सुनते हैं किन्तु हमारी बुद्धि में जब यथार्थ विचार आया, तब हम इसका रहस्य समझ पाये हैं और तभी से हम सब में एक ही आत्मा देखते हैं ।
(क्रमशः)

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