🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
*दादू पाखर पहर कर, सब को झूझण जाइ ।*
*अंग उघाड़ै शूरवां, चोट मुँहैं मुँह खाइ ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ शूरातन का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *वीर*
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शत्रुजित के पुत्र ऋतुध्वज ने गालव की रक्षा करने के लिये उन्हीं के दिये कुवलय नामक घोड़े पर चढकर पाताल केतु आदि अनन्त असुरों को मारा था और पाताल से मदालसा को ले आया था । कुवलय नामक घोड़ा गालव को सूर्य ने दिया था ।
वीर एक ही अमित को, मार विजय झट पाय ।
मारे ऋतध्वज ने असुर, प्रकट पुराण सुनाय ॥७६॥

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