सोमवार, 2 नवंबर 2020

= १६३ =

🌷🙏🇮🇳 #daduji 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 卐 सत्यराम सा 卐 🙏🌷
*राखणहारा एक तूँ, मारणहार अनेक ।*
*दादू के दूजा नहीं, तूँ आपै ही देख ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ बिनती का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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एक संत कुटिया में बैठे थे, पास होकर एक नारी निकली, उसे देखने को एक पैर कुटिया के बाहर रखा कि उन्हे चेत हुआ । भगवान का भय मान कर वहां ही रुक गये और जो पैर बाहर निकला था, उसे वहां ही बर्फ से गला कर खण्ड - खण्ड करके गिरा दिया ।
जाय अंग जो पाप दिशि, उसे संत दे दण्ड ।
तिय लखने हित पद बढा, गला गिराया खंड ॥३३॥

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