सोमवार, 9 नवंबर 2020

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🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
*ज्यों रचिया त्यों होइगा, काहे को सिर लेह ।*
*साहिब ऊपरि राखिये, देख तमाशा येह ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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रामचन्द्रजी के राजगद्दी का मुहूर्त विशिष्ठजी ने सोच विचार कर ही निकाला था किंतु राज्य के स्थान में रामजी को वन में जाना पड़ा । दशरथ जी को हर्ष के स्थान में मृत्यु मिली । कैकेयी को अपयश मिला, यह कौन जानता था ।
अति विचित्र है कर्म गति, बंधु भी मोहित होय ।
वृथा वसिष्ठ मुहूर्त गया, जानत है सब कोय ॥११३॥

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