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🦚 *#श्रीदादूवाणी०भावार्थदीपिका* 🦚
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भाष्यकार - ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर स्वामी आत्माराम जी महाराज, व्याकरणवेदान्ताचार्य । साभार विद्युत संस्करण ~ रमा लाठ
*#हस्तलिखित०दादूवाणी* सौजन्य ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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(#श्रीदादूवाणी ~ शब्द का अंग २२ - १७/२०)
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*दादू काहे कौड़ी खर्चिये, जे पैके सीझै काम ।*
*शब्दों कारज सिध भया, तो श्रम न दीजै राम ॥१७॥*
जो कार्य एक रुपया से ही बन रहा है तो उसके लिये करोड़ रुपये खर्च करना व्यर्थ ही है । इसी प्रकार जब सद्गुरु बोधित ब्रह्म प्रतिपादक शब्दों के विचार से ही ब्रह्म प्राप्त हो जाय तो फिर शरीर को क्लेश देने वाले सकाम कर्म तथा तपश्चर्यादि साधनों की क्या आवश्यकता है ? व्यर्थ ही अपनी आत्मा को कष्ट देना है । जैसे आक के वृक्ष में ही शहद मिल जाय तो फिर पर्वत पर चढ़ने का क्लेश क्यों किया जाय ।
वाक्यपदीय में लिखा है कि- शब्द ब्रह्म के विषय में कहा है कि मोक्ष प्राप्ति के सभी मार्गों में शब्द ब्रह्म का ज्ञान मुख्य साधन है और मोक्ष प्राप्त करने वालों के लिए ये सीधा राजमार्ग है ।
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*दादू राम हृदय रस भेलि कर, को साधु शब्द सुनाइ ।*
*जानो कर दीपक दिया, भ्रम तिमिर सब जाइ ॥१८॥*
जो महात्मा भक्तिरस में डूबे रहते हैं उन महात्माओं के ब्रह्मबोधक वाक्यों के श्रवणमात्र से भ्रान्ति की निवृत्ति हो जाने से सहज में ही ब्रह्म प्राप्त हो जाता है । उनके शब्दों में अचिन्त्यशक्ति होती है । जैसे जिसके हाथ पर दीपक रखा हो तो उसका अंधकर मिट जाता है । वैसे ही उनके वाक्यों से अनायास ही ब्रह्मज्ञान हो जाता है । क्योंकि वे महात्मा क्षण भर भी ब्रह्मानुभूति को त्याग कर नहीं रहते ।
सर्ववेदान्तसिद्धान्तसार में लिखा है कि- जिनकी आत्मा पवित्र है और मोक्ष को चाहते हैं उनके लिये यह निष्कण्टक मार्ग है कि वे अपने को ब्रह्म में स्थित बनाये रखें । जिससे उन को सर्वत्र सद् ब्रह्म ही का दर्शन होता रहे ।
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*दादू वाणी प्रेम की, कमल विकासै होहि ।*
*साधु शब्द माता कहैं, तिन शब्दों मोह्या मोहि ॥१९॥*
जैसे जैसे भक्त का हृदय संशयविपर्यय दोषों से रहित होकर निर्मल होता जाता है । तब भक्त के मुख से भगवद् भाव से परिपूर्ण वाणी जो चमत्कारपूर्ण होती है अपने आप ही निकलने लगती है । जिससे सुनकर हर प्राणी मोहित हो जाता है ।
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*दादू हरि भुरकी वाणी साधु की, सो परियो मेरे शीश ।*
*छूटे माया मोह तैं, प्रेम भजन जगदीश ॥२०॥*
हरि भक्त की चमत्कार दिखाने वाली वाणी मेरे अन्तःकरण में अद्भुत प्रभाव को पैदा करे । जिससे मेरा मन मायिक मोह से मुक्त होकर प्रेम से हरि भजन में लगे ।
(क्रमशः)

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