🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🦚 *#श्रीसंतगुणसागरामृत०३* 🦚
https://www.facebook.com/DADUVANI
स्वामी माधवदास जी कृत श्री दादूदयालु जी महाराज का प्राकट्य लीला चरित्र ~
संपादक-प्रकाशक : गुरुवर्य महन्त महामण्डलेश्वर संत स्वामी क्षमाराम जी ~
.
(“पंचमोल्लास” ६४/६६)
.
*संतों ने आदेश दिया सब कोई भोजन लो*
*तवै नृप से वचन बखाना,*
*मनिष हुं भोजन पशु को दाना ।*
*सब काहूं को भोजन दीया,*
*जैता दुख तैता सुख कीया ॥६४॥*
तब राजा ने सबको यह वचन कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अन्नादि भोजन और पशुओं को घास दाना दिया जावे । सारी प्रजा को भोजन दिया और जितना दुख पहले पाया था उतना ही सुख अब राजा ने सबके लिये कर दिया ॥६४॥
.
*केदार देश टापू माहि, नृपति आराध कीयो ।*
*अन्नजल त्याग दियो, नरनारी सबहि ॥*
*हा हा कार भयो जब, आमावती सुने तब,*
*बैगही पधारे स्वामी, दुख मेट्यो सबहि ।*
*स्वामी आये देस मंझारू,*
*निर्गुण स्वरूप सुनिर्मल सारू ।*
*आरति सहित जो ध्यावें स्वामी,*
*रामति कांनी अंतरजामी ॥६५॥*
स्वामी दादूजी केदार देश में आये उनका स्वरूप रजतमादि गुणों से रहित सूक्ष्म निर्मल व सार रूप था । जो कोई आरति प्रार्थना सहित दादूजी का ध्यान करता है अंतरजामी उसमें रमण करते हैं ॥६५॥
.
*श्री दादूजी का स्वरूप महिमा*
*गछत गछत जो चालै पंथा,*
*झीणां स्वरूप निर्गुण कंथा ।*
*पैंड पैंड अमीरस पीजे,*
*पैड़ पैड परि ज्ञान कथीजै ॥६६॥*
श्री दादूजी धीरे-धीरे रास्ते पर चल रहे हैं उनका सूक्ष्म स्वरूप है और निर्गुण ब्रह्म ही उनका वस्त्र है । पद पद पर वे ब्रह्म रस का पान कर रहे हैं और पद पद पर ज्ञान की चर्चा जिज्ञासुओं से कर रहे हैं ॥६६॥
(क्रमशः)

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें