🌷🙏🇮🇳 *#daduji* 🇮🇳🙏🌷
🌷🙏 *卐 सत्यराम सा 卐* 🙏🌷
🌷 *#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु* 🌷
*दादू होना था सो ह्वै रह्या, जे कुछ किया पीव ।*
*पल बधै न छिन घटै, ऐसी जानी जीव ॥*
*(#श्रीदादूवाणी ~ विश्वास का अंग)*
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साभार ~ ### स्वामी श्री नारायणदासजी महाराज, पुष्कर, अजमेर ###
साभार विद्युत् संस्करण ~ महन्त रामगोपालदास तपस्वी तपस्वी
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*#०दृष्टान्त०सुधा०सिन्धु*, *सुख दुख निरूपण*
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पुष्करराज में एक छोटी सी बस्ती में सावित्री प्रसाद जी ब्राह्मण के पैर में दर्द था, उनसे उठा बैठा भी नहीं जाता था । उनका बड़ा पुत्र अपनी पत्नी को उसके पिता के घर से लेकर आ रहा था, साथ में दो बच्चे भी थे । अजमेर से तांगे में पुष्कर जाते समय नदी में बह गये । केवल तांगा वाला बचा । यह खबर सुन जब सावित्री प्रसाद जी को मिली तब उन्हें अपने पैर के दुख का कुछ भी भान न रहा ओर वे अपने आप उठ कर हनुमानगढी तक आ गये थे, फिर लोगों ने उन्हें समझा बुझा कर रोका था ।
अति दुख में भी हो नहीं, थोड़े दुख का भान ।
मैं सावित्री प्रसाद का, नयनों लखा सुजान ॥६१॥

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